रक्षा मंत्रालय ने चीन सीमा पर कृत्रिम मेधाआधारित व ड्रोन से निगरानी बढ़ाने की विस्तृत रूपरेखा की तैयार :

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सीमा पर गश्त बढ़ाई जा रही है। बाड़बंदी और खुफिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। भारत की पूरी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ढांचागत निर्माण के लिए 602.3 करोड़ रुपए रखा गया है। वर्ष 2020-21 में यह 355.1 करोड़ रुपए था।

सेना के कमांडर सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमा पर गश्त, सुरक्षा चौकियों और नाकों का पर्याप्त बंदोबस्त किया गया है। ऐसे स्थलों की पहचान की गई है, जहां से सीमा-सुरक्षा को खतरा हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, सीमाई क्षेत्रों में आधुनिक निगरानी उपकरण तैनात किए गए हैं। नदी घाटी जैसे इलाकों में, जहां जवान तैनात नहीं किए जा सकते, वहां आधुनिक तकनीक की मदद से सीमा-सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। सीमा पर बाड़ लगाई गई है। साथ ही, खुफिया-तंत्र मजबूत किया गया है।

केंद्र सरकार ने चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर ढांचागत निर्माण के लिए खर्च किए जाने वाले बजट को छह गुणा से ज्यादा बढ़ाया है। इस मद में बजट 2020-21 में 42.9 करोड़ था। वर्ष 2021-22 में बढ़ाकर इसे 249.1 करोड़ कर दिया गया है। सरकार ने ‘बार्डर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड मैनेजमेंट स्कीम’ के तहत यह राशि असम और पूर्वोत्तर के राज्यों से लगने वाली एलएसी पर ढांचागत निर्माण में खर्च किया है। नई सड़कें, पुल, रेललाइन बनाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, एलएसी पर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सीमाई इलाकों में जरूरत के मुताबिक सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाई गई है।

चीन की सीमा की ही तरह भारत-म्यांमा के सीमाई इलाकों में भी सुरक्षा प्रबंधों का खर्च ढाई गुना तक बढ़ाया गया है। यह 2020-21 में 17.4 करोड़ रुपए था। इसे 2021-22 में बढ़ाकर 50 करोड़ रुपए किया गया है। बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा के लिए बजट 2020-21 के 294.9 के मुकाबले 2021-22 में 303.2 करोड़ रुपए किया गया है।

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पैंगोंग त्सो झील पर पुल बनाने के बाद चीन अब तेजी से सड़क निर्माण कर रहा है। इस सड़क को झील के दक्षिणी किनारे पर बनाया जा रहा है। यह सड़क चीन के रुतोंग काउंटी तक बनाई जा रही है, जहां चीनी सेना का ब्रिगेड मुख्यालय है। यह सड़क उसी इलाके के नजदीक बनाई जा रही है, जहां पिछले साल भारतीय सेना ने कब्जा जमा लिया था। लेकिन, कई दौर की सैन्य वार्ता के बाद दोनों ही देशों ने अपनी-अपनी सेना को अग्रिम मोर्चे से पीछे हटा लिया था।

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