एकेएस में मनाया गया अंतरराष्ट्रीय फल दिवस ।

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सतना एकेएस विश्वविद्यालय के सभागार में अंतरराष्ट्रीय फल दिवस 1 जुलाई 2023 को मनाया गया । इस दिन अंतर्राष्ट्रीय फल दिवस के बारे में जानकारी देते हुए डॉ राजेंद्र प्रसाद अवार्ड प्राप्त कर चुके और राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय ,पूसा ,बिहार के पूर्व कुलपति और उद्यानिकी पर 11 से ज्यादा पुस्तकें लिख चुके देश के जाने-माने उद्यानविद डॉ. केआर.मौर्य ने बताया की अंतर्राष्ट्रीय फल दिवस प्रतिवर्ष 1 जुलाई को विश्व भर में मनाया जाता है ।इसे पहली बार सन 2007 में जर्मनी के बर्लिन के माउर पार्क में यूनिवर्सिटी ऑफ़ अप्लाइड साइंसेज के सामाजिक कार्य के छात्रों ने मनाया था। उस दिन छात्रों ने सभी को भोजन के रूप में फलों एवं सब्जियों को परोसा था तथा सभी ने शपथ ली थी कि आज से हम मांसाहारी भोजन का त्याग करते हुए शाकाहारी भोजन अपनाएंगे ।मनुष्य के अतिरिक्त कुछ पशु पक्षियों ने भी शाकाहार को ही अपना पसंदीदा आहार चुना था ।पशुओं में गाय,भैंस, बकरी, हिरण ,जिराफ ,घोड़ा, हाथी ,ऊंट, घोड़ा शाकाहारी पशु है ।शाकाहारी पक्षियों में तोता तथा कबूतर तथा कीड़ों में मधुमक्खियां उल्लेखनीय है। दुनिया में उग्रवाद का बोलबाला मांसाहारी भोजन के कारण तेजी से फैल रहा है ।आजकल के मानव का आचार विचार आहार के कारण दूषित हो गया है ।मानव का शाकाहार तेल, घी में तलकर या आग में पका कर खाना होता है ।जबकि पशुओं का शाकाहार कच्ची तथा ताजी अवस्था में खाना होता है। संसार के कई महान बुद्धिजीवी शाकाहारी थे। जैसे रूसो ,इमर्शन, शेक्सपियर,अरस्तु ,प्लूटो, एचजी वेल्स ,जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, लियोनार्डो द विंची, आइंस्टाइन ,टॉलस्टॉय तथा एनी बेसेंट ।भारतीय मूल के प्रमुख फलों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इनमें आम, केला, आमला और बेल प्रमुख हैं। धर्म ग्रंथों में लिखित फलों का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया की श्री राम ,लक्ष्मण और माता सीता का 14 वर्षों तक आहार कंदमूल तथा फल ही था। चित्रकूट में पर्णकुटी के चारों तरफ फलों को राम ,लक्ष्मण तथा माता सीता ने लगाया था ।शकल फूल, फल, कदली ,रसाला । रोपी बकुल कदंब तमाला। तुलसी तरुवर विविध सुहाय ।कहूं सिया राम, कहूं लखन लगाए । पंचवटी अशोक वाटिका में हनुमान जी माता सीता से हाथ जोड़कर कहते हैं कि सुनाऊं मांतु मोहि अतिशय भूखा। लगी देख सुंदर फल रुखा । सुनी सुत्त करही विपिन रखवारी । परम शुभट रजनी चर भारी।तिन्ह कर भय माता मोहि नाही। जो तुम सुख मनहू मन माही। देखी बुध्दि बलनी पुन कपी। कहेऊ जानकी जहू रघुपति चरण हृदय धरी।तात मधुर फल खाऊ। मुगल काल में फलों की अहमियत बताते हुए श्री मौर्य ने कहा किसम्राट अकबर को फलों से अटूट प्रेम था । उसने हजारीबाग, झारखंड में 1000 आम के वृक्ष लगाकर हजारीबाग की स्थापना की थी ।तथा बिहार के दरभंगा जिले में 100000 आम के वृक्ष लगाकर लक्खेबाड़ा की स्थापना की थी ।सम्राट अकबर का साला अमीर खुसरो था उसने इलाहाबाद में खुसरो बाग बनाया था जो आज भी दर्शनीय भाग है ।भारत का राष्ट्रीय फल भी आम है ।यज्ञ ,शादी, विवाह तथा श्राद्ध में आम की लकड़ी पर शव को जलाने की परंपरा है ।यज्ञ में कलश पर आम की टहनी के ऊपर दीपक नारियल रखा जाता है ।कल्पवृक्ष नारियल को कहा जाता है ।भोजन, वस्त्र, घर ,जलवायु ,दवा, फर्नीचर ,मिट्टी ईंधन, तथा सुखद पर्यावरण पेड़ों से ही मिलते हैं। केला देवताओं के गुरु बृहस्पति भगवान का वृक्ष और अपार ऊर्जा का स्रोत है। अंग्रेजी में एक कहावत है एन एप्पल डे ।कीप्स डॉक्टर अवे ।इसी तरह नींबू को फ्रूट ऑफ द ईयर 2023 का खिताब दिया गया है ।अक्षय नवमी के दिन आंवले के पेड़ के नीचे स्त्रियां व्रत, त्यौहार और उपवास रखकर पूजा अर्चना करती हैं। उन्होंने फूलों और फलों के बारे में रोचक प्रसंगों पर चर्चा की। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने अन्य विषयों पर भी सारगर्भित जानकारी दी कार्यक्रम के दौरान एक यश विश्वविद्यालय के डायरेक्टर अमित कुमार सोनी, प्रति कुलपति प्रोफेसर आर.एस. त्रिपाठी के साथ स्वागत भाषण अधिष्ठाता प्रो. एस. एस. तोमर ने किया। आभार डॉ अभिषेक सिंह एचओडी, उद्यान विभाग ने किया। अंतरराष्ट्रीय फल दिवस के आयोजन का संचालन डॉ भारती ने किया।

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