पर्चा के खेल की खुली पोल नया बाबा हुआ फेल

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योजना के तहत बाबा करता था खेल, सामने आई हकीकत
वर्तमान मे बागेश्वर धाम के तर्ज मे पर्चा बनाने का खेल करने वाला तथाकथित बाबा आदर्श कृष्ण शास्त्री इतनी कम उम्र में दिमाग से इतना शातिर होगा किसी ने सोचा नही था।सहिजना ऊँचेहरा के छोटे से गांव के अत्यंत गरीब परिवार का लड़का जिसके पिता बस चला कर अपने परिवार को पालते थे उनके इस पुत्र ने आश्रम के नाम पर लोगो को भ्रमित करके पैसा कमाने का नया धंधा खोला ही था कि आपसी लेनदेन के मतभेद ने बाबा कि पोल खुलवा दी,नाम न बताने के शर्त मे आश्रम मे ही बाबा के साथ रहने वाले व्यक्ति ने बताया कोई सिद्धि प्राप्त नहीं हैं सब इसका आडम्बर हैं, और तो और ज़ब पता लगा कि बाबा जो पर्चे खोलता और लोगो के बारे मे बताता हैं वह पूर्व योजना का एक हिस्सा हैं, जिसका जीता जागता प्रमाण मिला।

एक युवती जिसे बाबा पूर्व से जानता था, उसको मोहरा बनाकर घर से पर्चा बनाकर लाने कि बात कही, और उससे उसके माता पिता और दादा के नाम लिखने को कहा, उसके बाद बाबा पूर्व नियोजित योजना के तहत तिहाई मे दरबार लगाने के दौरान बोला ऐसी कोई महिला हैं जो घर से पर्चा बनाकर लाइ हैं खड़ी हो जाए, वही परिचित लड़की खड़ी हो गई और उसके बाद बाबा ने कहा कि इस पर्चे को किसी पढ़े लिखें व्यक्ति के पास ले जाओ, मानो बाकी सब अनपढ़ ही दरबार मे बैठे हो,यह घटना वीडियो में कैद हो गई। इसका पाखंड का सिलसिला इतने मे भी नहीं रुका सुनियोजित ढंग से एक तरफ से नाम बोलते हुए तालिया बजवाकर अपनी वाहवाही लूटते हुए लोगो को लूटने का कार्य करता हैं। पाखंडी बाबा आदर्श कृष्ण शास्त्री के कारनामो की जितना भी बखान किया जाए कम हैं, क्युकि बाबा के इन्ही ठग विद्या जैसे कृत्यो के पोल खुलने के कारण कई ठिकानो से खदेड़ा गया हैं जिसमे बिरसिंगपुर के पास बरेहना उसके बाद बदखर, फिर तिहाई जैसे ठिकानो मे शरण लेना पड़ा सिलसिला इतने मे भी नहीं थमा अपने आदतों से मजबूर बाबा पुनः अपने कृत्यो को दोहराने पर तिहाई के लोगो ने बाबा को मारने के लिए घेर लिया, सतना के बड़े राजनेताओं के हस्ताछेप से बाबा वहा से निकल पाया।
अभी मन चले बाबा कि कहानी शेष अगले अंक मे पढ़ने के लिए जुड़े रहिए।

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