अनिल गर्ग के साथ अधीक्षण यंत्री का रिश्ता, यह क्या कहलाता है ?

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अधीक्षण यंत्री का व्यक्तिगत स्वार्थ ले डूबेगा भाजपा सरकार

सतना: एक कहावत है “जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का” इस कहावत का मतलब तो आप अच्छी तरह समझ गए होंगे कि जब कोई बड़ा अधिकारी अपना खासम खास होता है तो किसी भी सरकारी नियम अधिनियम का पालन करने की कोई आवश्यकता ही नहीं होती । जिले मे अधीक्षण यंत्री के संरक्षण मे इन दिनों विद्युत् विभाग के कुछ अधिकारियों की मनमानी चरम पर है। जिसका जीता जागता उदाहरण है वितरण केंद्र जैतवारा से स्थानत्रित हुए वितरण केन्द्र प्रभारी अनिल गर्ग । जो की स्थानांतरण आदेश के उपरांत गुमशुदा है लेकिन विद्युत विभाग से वेतन प्राप्त कर रहे है । कर्मचारियों की सेवाकाल के समय चिकित्सा अवकाश एवं अन्य अवकाशो की समय-सीमा निर्धारित है। परंतु जिले के अधीक्षण यंत्री के संरक्षण में इनके अवकाश की कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है। अनिल गर्ग अपनी सुविधा अनुसार आते-जाते रहते हैं । अनिल गर्ग के द्वारा वितरण केन्द्र कोठी के प्रभारी रहते हुए अवकाश लेने का जो सिलसिला शुरु हुआ वह आज भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कोठी वितरण केन्द्र से जैतवारा स्थानांतरण होने के बाद भी इनकी मनमर्जी लगातार जारी है और ये लगातार अवकाश मे ही बने रहे।
बिरसिंहपुर वितरण केन्द्र में स्थानांतरण के उपरांत ये लापता ही हो गये और अधीक्षण यंत्री के द्वारा इनके स्थानांतरण आदेश को भी निरस्त कर दिया गया जो एक बड़ा सवाल पैदा करता है सूत्र बताते है कि अनिल गर्ग अधीक्षण यंत्री के कार्यकाल मे कनिष्ठ अभियंता बनना और मनचाहे स्थान मे इनकी नियुक्ति सिर्फ एक मुलाकात मे ही हो जाती है ।
अभी पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कम्पनी के एम डी श्री अनय दुवेदी के द्वारा सिवनी के अधीक्षण यंत्री को स्थानांतरण आदेश के उपरांत निर्धारित समय मे उपस्थति न देने की वजह से निलंबित कर दिया गया था। लेकिन अधीक्षण यंत्री के द्वारा आयल के ऊपर किसी भी तरह की कोई भी कार्यवाही ना किया जाना सवालों के घेरे में है लगातार अनिल गर्ग को संरक्षण प्रदान कर रहे अधीक्षण यंत्री श्री त्रिपाठी खुद ही सवालों के घेरे में है ।

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